Safar ki Dua in Hindi : सीखें सफर कि दुआ कुरान और हदीस कि रौशनी में तर्जुमे के साथ

अस्सलामुअलैकुम अल्लाह ने हमें एक बेहतरीन जीवन जीने के लिए दीन ए इस्लाम दिया है जिसमें दुआएं भी शामिल है, अगर बात करें Safar ki Dua क्या है? तो हर मुस्लिम को यह दुआ जरुर आनी चाहिए क्योंकि हम रोज या कभी-कभी सफर के लिए जरूर निकलते है, और इन इन दुआओं को पढ़कर हम अल्लाह की पनाह में आ जाते हैं।

अब बात करते है सफऱ कि सहीह दुआ क्या है? क्योंकि ऐसी कही जहीफ या मौजू हदीस भी हो सकती है इसलिए हमें दीन के मामले में तहकीक करनी जरुरी है, तो चलिए जानते है कि सफऱ कि दुआ क्या है क़ुरान और सहीह हदीस कि रौशनी में।

Safar ki Dua in Hindi
Safar ki dua

Safar ki Dua

सफर के लिए तीन तरह कि अलग अलग दुआ हो सकती है जैसे सफऱ से पहले, सफऱ के दरमियान या बीच में और सफऱ के बाद इसलिए हम सभी दुआओं को हिंदी तर्जुमा के साथ सीखेंगे।

क़ुरान में जिक्र

Surat No 43 : سورة الزخرف - Ayat No 13

 لِتَسۡتَوٗا عَلٰی ظُہُوۡرِہٖ  ثُمَّ تَذۡکُرُوۡا نِعۡمَۃَ  رَبِّکُمۡ  اِذَا اسۡتَوَیۡتُمۡ عَلَیۡہِ وَ تَقُوۡلُوۡا سُبۡحٰنَ الَّذِیۡ سَخَّرَ لَنَا ہٰذَا  وَ مَا کُنَّا لَہٗ  مُقۡرِنِیۡنَ ﴿ۙ۱۳
Surat No 43 : سورة الزخرف - Ayat No 14

 وَ  اِنَّاۤ  اِلٰی  رَبِّنَا  لَمُنۡقَلِبُوۡنَ ﴿۱۴
ताकि तुम उनकी पीठ पर चढ़ो और जब उनपर बैठो तो अपने रब का एहसान याद करो और कहो कि “पाक है वो जिसने हमारे लिये इन चीज़ों को ख़िदमतगार बनाया वरना हम इन्हें क़ाबू में लाने की ताक़त न रखते थे,

[ सूरह नं 43 : आयत नं 13 ]  
और एक दिन हमें अपने रब की तरफ़ पलटना है।

[ सूरह नं 43 : आयत नं 14 ] 

सफऱ कि दुआ के लिए सहीह हदीस

सफऱ के लिए दो प्रकार की दुआ हो सकती हैं, एक सफर में जाने से पहले और दूसरी सफर से लौटते वक़्त इसलिए हमें दोनों ही दुआ दुआ याद करनी चाहिए तो चलिए सीखते हैं –

सफऱ में जाने कि दुआ

Safar ki Dua
Safar ki Dua

اللَّهُ أَكْبَرُ،اللَّهُ أَكْبَرُ،اللَّهُ أَكْبَرُ، سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ أَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، أَللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، أَللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الأَهْلِ، أَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالأَهْلِ

Reference : Sahih Muslim 1342

अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, सुब्हानल् लज़ी सख्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़रेनीन, व-इन्ना इला रब्बिना ल-मुनक़लेबून, अल्लाहुम्मा इन्ना नस्अलुका फी सफरिना हाज़ा अल-बिर्रा वत-तक़्वा, वमिनल अमले मा तर्ज़ा, अल्लाहुम्मा हौविन अलैना सफरना हाज़ा, वत्वे अन्ना बोअदह्, अल्लाहुम्मा अन्तस् साहिबो फिस्सफर, वल-ख़लीफतो फिल अह्ल, अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ो बिका मिन् वअसाइस् सफर, व-कआबतिल मन्ज़र, व-सूइल मुंक़लबे फिल माले वल अह्ल।

अल्लाह सब से बड़ा है, अल्लाह सब से बड़ा है, अल्लाह सब से बड़ा है, पाक व पवित्र है वह अस्तित्व जिसने इसे हमारे अधीन कर दिया, अन्यथा हम इसे क़ाबू में ला सकने वाले नहीं थे। और हम निःसंदेह अपने पालनहार की ओर लौटने वाले हैं, ऐ अल्लाह ! हम अपने इस सफर में तुझसे नेकी और तक़्वा का प्रश्न करते हैं और उस काम का जिसे तू पसंद करता है। ऐ अल्लाह हमारा यह सफर हम पर आसान कर दे, और इसकी दूरी हमसे समेट दे। ऐ अल्लाह तू ही सफर में साथी और घर वालों में उत्तराधिकारी है, ऐ अल्लाह मैं सफर के कष्ट से और धन और परिवार में दुखद दृश्य और असफल लौटने की बुराई से तेरी पनाह चाहता हूँ।

सफर से लौटने कि दुआ

اللَّهُ أَكْبَرُ،اللَّهُ أَكْبَرُ،اللَّهُ أَكْبَرُ، سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ أَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، أَللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، أَللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الأَهْلِ، أَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالأَهْلِ آيِبُونَ ، تائبُونَ ، عابدُونَ ، لرَبِّنَا حامِدُون

Reference : Sahih Muslim 1342

अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, सुब्हानल् लज़ी सख्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़रेनीन, व-इन्ना इला रब्बिना ल-मुनक़लेबून, अल्लाहुम्मा इन्ना नस्अलुका फी सफरिना हाज़ा अल-बिर्रा वत-तक़्वा, वमिनल अमले मा तर्ज़ा, अल्लाहुम्मा हौविन अलैना सफरना हाज़ा, वत्वे अन्ना बोअदह्, अल्लाहुम्मा अन्तस् साहिबो फिस्सफर, वल-ख़लीफतो फिल अह्ल, अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ो बिका मिन् वअसाइस् सफर, व-कआबतिल मन्ज़र, व-सूइल मुंक़लबे फिल माले वल अह्ल, आयेबून, तायेबून, आबिदून, लि-रब्बिना हामिदून

अल्लाह सब से बड़ा है, अल्लाह सब से बड़ा है, अल्लाह सब से बड़ा है, पाक व पवित्र है वह अस्तित्व जिसने इसे हमारे अधीन कर दिया, अन्यथा हम इसे क़ाबू में ला सकने वाले नहीं थे। और हम निःसंदेह अपने पालनहार की ओर लौटने वाले हैं, ऐ अल्लाह ! हम अपने इस सफर में तुझसे नेकी और तक़्वा का प्रश्न करते हैं और उस काम का जिसे तू पसंद करता है। ऐ अल्लाह हमारा यह सफर हम पर आसान कर दे, और इसकी दूरी हमसे समेट दे। ऐ अल्लाह तू ही सफर में साथी और घर वालों में उत्तराधिकारी है, ऐ अल्लाह मैं सफर के कष्ट से और धन और परिवार में दुखद दृश्य और असफल लौटने की बुराई से तेरी पनाह चाहता हूँ। हम वापस लौटने वाले, तौबा करने वाले, उपासना करने वाले और अपने पालनहार ही की प्रशंसा करने वाले हैं।”

Safar ki Dua – फायदे

सफऱ कि दुआ के अल्लाह ने बहुत फायदे रखे है, इसलिए हमें इन्हे पढना चाहिए यह इस तरह है –

  • सफर में कि गयी दुआ अल्लाह रद्द नहीं करता।
  • अल्लाह सफर में होने वाली परेशानियों से बचाता है।
  • अल्लाह हमारे माल और घरवालों कि हिफाजत फरमाता है।
  • अल्लाह सफर को आसान बना देता है।
  • अल्लाह परिवार में दुखद दृश्य और असफल लौटने की बुराई से बचाता है।
  • सफर में दुआ करना भी नेकी है।

सफर के अहकाम और मसाइल

सफऱ के कुछ अहकाम और मसाइल है, जो इस प्रकार है –

सफऱ में नमाज को मुख़्तसर कर सकते है

Surat No 4 : سورة النساء - Ayat No 101

وَ اِذَا ضَرَبۡتُمۡ فِی الۡاَرۡضِ فَلَیۡسَ عَلَیۡکُمۡ جُنَاحٌ اَنۡ تَقۡصُرُوۡا مِنَ الصَّلٰوۃِ ٭ۖ اِنۡ خِفۡتُمۡ اَنۡ یَّفۡتِنَکُمُ الَّذِیۡنَ کَفَرُوۡا ؕ اِنَّ الۡکٰفِرِیۡنَ کَانُوۡا لَکُمۡ عَدُوًّا مُّبِیۡنًا ﴿۱۰۱﴾

और जब तुम लोग सफ़र के लिये निकलो तो इसमें कोई हरज नहीं अगर नमाज़ को मुख़्तसर कर दो। [ 132]  [ ख़ास तौर से] जबकि तुम्हें डर हो कि कुफ़्र करनेवाले लोग  [ दुश्मन] तुम्हें सताएँगे, [ 133] क्योंकि वो खुल्लम-खुल्ला तुम्हारी दुश्मनी पर तुले हुए हैं।

सफऱ में वजू के लिए पैरो पर मशह कर सकते है

सफर में हम वजू के लिए पैरो पर मशह कर सकते है, लेकिन जो पैरो में पहना हो ( जुराब, कपड़ा ) वो वजू करके पहना हो 

सफर में तहमूम कर सकते है

Surat No 4 : سورة النساء - Ayat No 43

 یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡا لَا تَقۡرَبُوا الصَّلٰوۃَ وَ اَنۡتُمۡ سُکٰرٰی حَتّٰی تَعۡلَمُوۡا مَا تَقُوۡلُوۡنَ وَ لَا جُنُبًا اِلَّا عَابِرِیۡ سَبِیۡلٍ حَتّٰی تَغۡتَسِلُوۡا ؕ وَ اِنۡ کُنۡتُمۡ مَّرۡضٰۤی اَوۡ عَلٰی سَفَرٍ اَوۡ جَآءَ اَحَدٌ مِّنۡکُمۡ مِّنَ الۡغَآئِطِ اَوۡ لٰمَسۡتُمُ النِّسَآءَ فَلَمۡ تَجِدُوۡا مَآءً فَتَیَمَّمُوۡا صَعِیۡدًا طَیِّبًا فَامۡسَحُوۡا بِوُجُوۡہِکُمۡ وَ اَیۡدِیۡکُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ  کَانَ عَفُوًّا غَفُوۡرًا ﴿۴۳﴾

ऐ लोगो जो ईमान लाए हो, जब तुम नशे की हालत में हो तो नमाज़ के क़रीब [ 65] न जाओ। नमाज़ उस वक़्त पढ़नी चाहिए जब तुम जानो कि क्या कह रहे हो [ 66] और इसी तरह नापाकी [ 67] की हालत में भी नमाज़ के क़रीब न जाओ जब तक कि ग़ुस्ल न कर लो, ये और बात है कि रास्ते से गुज़रते हो [ 68] और अगर कभी ऐसा हो कि तुम बीमार हो या सफ़र में हो, या तुममें से कोई शख़्स ज़रूरत पूरी  [ पाख़ाना-पेशाब] करके आए या तुमने औरतों को हाथ लगाया हो [ 69] और फिर पानी न मिले तो पाक मिट्टी से काम लो और उससे अपने चेहरों और हाथों पर मसह कर लो  [ हाथ फेर लो]। [ 70] बेशक अल्लाह नरमी से काम लेनेवाला और माफ़ करनेवाला है।

Safar ki Dua Pdf Download

सफऱ कि दुआ को याद करने के लिए आप इसे पीडीऍफ़ फॉर्मेट में भी डाउनलोड कर सकते हो, निचे डाउनलोड बटन पर क्लिक करें

Safar ki Dua in Hindi

Conclusion – निष्कर्ष

आज हमने Safar ki Dua क़ुरान और सहीह हदीस कि रौशनी में सीखी है, जिसको पढ़कर अमल करने में अल्लाह ने बहुत फायदे रखे है इसलिए हमें सफर में जाने और लौटने से पढ़ले यह दुआए पढ़नी चाहिए और दीन के मामले में हमें तहकीक करते रहना चाहिए क्योंकि हम इंसान है और गलती हो जाती है, अगर मेरे द्वारा इस पोस्ट में गलती हो तो आप दुआ करना अल्लाह मुझे माफ करें आमीन। इसी तरह दीन ए इस्लाम से जुडी सही जानकारी पाने के लिए हम से जुड़े रहिए और हमारे लिए दुआ करें आमीन।

Safar ki Dua – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सफर की दुआ कौन सी है?

सफऱ में जाने कि दुआ
اللَّهُ أَكْبَرُ،اللَّهُ أَكْبَرُ،اللَّهُ أَكْبَرُ، سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ أَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، أَللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، أَللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الأَهْلِ، أَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالأَهْلِ

हिंदी तर्जुमा
अल्लाह सब से बड़ा है, अल्लाह सब से बड़ा है, अल्लाह सब से बड़ा है, पाक व पवित्र है वह अस्तित्व जिसने इसे हमारे अधीन कर दिया, अन्यथा हम इसे क़ाबू में ला सकने वाले नहीं थे। और हम निःसंदेह अपने पालनहार की ओर लौटने वाले हैं, ऐ अल्लाह ! हम अपने इस सफर में तुझसे नेकी और तक़्वा का प्रश्न करते हैं और उस काम का जिसे तू पसंद करता है। ऐ अल्लाह हमारा यह सफर हम पर आसान कर दे, और इसकी दूरी हमसे समेट दे। ऐ अल्लाह तू ही सफर में साथी और घर वालों में उत्तराधिकारी है, ऐ अल्लाह मैं सफर के कष्ट से और धन और परिवार में दुखद दृश्य और असफल लौटने की बुराई से तेरी पनाह चाहता हूँ।

सोने से पहले कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?

اَللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
Allahumma Bismika Amootu Wa Ahyaa
हिंदी तर्जुमा
ऐ अल्लाह! मैं तेरे ही नाम से मरता हूँ और तेरे ही नाम से ज़िन्दा होता हूँ।
Reference – (सहीह बुखारी 6324)

दुआ का मतलब क्या होता है?

दुआ : इस्लाम में, दुआ (अरबी : دعاء , बहुवचन: आदिया ), का शाब्दिक अर्थ अल्लाह से विनती या ” आह्वान ” है, यह प्रार्थना या अनुरोध की प्रार्थना है।

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