Qurbani Ki dua in Hindi |सीखें क़ुरबानी की दुआ क़ुरान और हदीस की रौशनी में पूरी जानकारी के साथ

अस्सलामुअलैकुम अल्लाह ने हमें जिंदगी जीने का बेहतरीन तरीका सीखाया है, दुआएं बताई है, ताकि हम अल्लाह की रजा पा सके और हमारा असल मकसद भी अल्लाह की रजा पाना हीं है इसलिए हमें सभी तरह की दुआ याद रहनी चाहिए, इसलिए आज हम Qurbani Ki dua in Hindi में सीखेंगे क्योंकि, कुर्बानी से पहले दुआ पढ़ने और इस पर अमल करने से इन शा अल्लाह जन्नत नसीब होंगी, तो चलिए दुआएं सीखने के सिलसिले में आज क़ुरबानी की दुआ सीखते है।

Qurbani ki Dua
Qurbani ki Dua

क़ुरबानी का कुरान में जिक्र

हम क़ुरबानी इसलिए करते हैं क्योंकि अल्लाह ने हमें क़ुरान में इसके बारे में बताया जो आप निचे पढ़ सकते हो –

Arabic

وَ لِکُلِّ اُمَّۃٍ جَعَلۡنَا مَنۡسَکًا لِّیَذۡکُرُوا اسۡمَ اللّٰہِ عَلٰی مَا رَزَقَہُمۡ مِّنۡۢ بَہِیۡمَۃِ الۡاَنۡعَامِ ؕ فَاِلٰـہُکُمۡ اِلٰہٌ وَّاحِدٌ فَلَہٗۤ اَسۡلِمُوۡا ؕ وَ بَشِّرِ الۡمُخۡبِتِیۡنَ ﴿ۙ۳۴﴾

हिंदी तर्जुमा

हर उम्मत के लिये हमने क़ुरबानी का एक क़ायदा तय कर दिया है; ताकि (उस उम्मत के) लोग उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उसने उनको बख़्शे हैं।(64) (इन अलग-अलग तरीक़ों के अन्दर मक़सद एक ही है) तो तुम्हारा ख़ुदा एक ही ख़ुदा है और उसी के तुम फ़रमाँबरदार बनो। और ऐ नबी, ख़ुशख़बरी दे दो आजिज़ाना रविश (विनम्र रवैया) अपनानेवालों को,

Surat No 22 : سورة الحج – Ayat No 34

Qurbani ki Dua

क़ुरबानी कि इस्लाम में बहुत अहमियत है, और इसमें बहुत सवाब भी है, क्योंकि अल्लाह ने क़ुरान में फ़रमाया हैँ ‘हर उम्मत के लिये हमने क़ुरबानी का एक क़ायदा तय कर दिया है’ इसलिए हमें Qurbani ki Dua जरूर सीखनी चाहिए तो चलिए सीखते है –

क़ुरबानी की 4 दुआएं हम आज सीखने वाले है –

Dua No. 1

Arabic

بسم الله
Bismillaah

हिंदी तर्जुमा

शुरू अल्लाह के नाम से

Reference : Sahi Bukhari 985

Dua No. 2

Arabic

بسملہ وللہو اکبر
Bimillah Wallahu Akbar

हिंदी तर्जुमा

शुरू अल्लाह के नाम से जो सबसे बड़ा है।

Reference : Sahi Muslim 1966b

Dua No. 3

Arabic

بِاسْمِ اللَّهِ اللَّهُمَّ تَقَبَّلْ مِنْ
Bismillah, Allah-humma Taqabbal min
आगे उसका नाम ले जिसकी तरफ से क़ुरबानी कर रहें

हिंदी तर्जुमा

शुरू अल्लाह के नाम पर, “हे अल्लाह, [ आगे उसका नाम ले जिसकी तरफ से क़ुरबानी कर रहें ] की ओर से इस कुर्बानी को स्वीकार कर”।

Reference : Sahih Muslim 1967

Dua No. 4

Arabic

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ عَلَى مِلَّةِ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ إِنَّ صَلاَتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَاىَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ اللَّهُمَّ مِنْكَ وَلَكَ عَنْ
[ आगे उसका नाम ले जिसकी तरफ से क़ुरबानी कर रहें
] [ नाम लेने के बाद यह दुआ पढ़े ]
بِاسْمِ اللَّهِ وَاللَّهُ أَكْبَرُ ‏”‏

हिंदी तर्जुमा

मैे अपना रुख उस जात कि तरफ करता हु जिसने जमीन और आस्मन को पैदा किया और पुरे इमान के साथ दीन्-ए-इब्रहीम पर कायम हु और मै शिर्क करने वालो में से नहीं हूँ और बिला शुबा मेरी नमाज और मेरी तमाम इबादत और मेरा जिना और मेर मरना सब अल्लाह रब्बुल ‘आलमीन के लिए है जिसका कोइ शरीक नही है और मुझे इसी का हुक्म दिय गया है और मै हुक्म कि इता’अत करने वालो में से हूँ ऐ अल्लह ये क़ुरबानी तेरी हीं अता से हैँ और तेरी हीं रजा के लिए हैँ [ आगे उसका नाम ले जिसकी तरफ से क़ुरबानी कर रहें ] [ नाम लेने के बाद यह दुआ पढ़े ] की तरफ से अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह सबसे बड़ा हैँ

Reference : Abu dawud 2795

क़ुर्बानी के अहकाम और मसाइल

क़ुरबानी के बहुत से अहकाम और मसाइल हैँ, जिन्हे हमें ध्यान में रखना चाहिए, जो इस तरह हैँ –

  • कुर्बानी के जानवर या किसी भी जानवर के सामने छुर्री या चाकू तेज न करें
  • नमाज पढ़ने के बाद हीं क़ुरबानी करें
  • पहले दिन क़ुरबानी करना अफजल हैँ
  • बाएं पहलू पर जानवर को लेटाएं
  • क़िबला की तरफ रुख करें तो और अच्छा हैँ
  • अपना पाँव क़ुरबानी के जानवर की गर्दन पर रखें
  • बांया हाथ उसकी गर्दन पर रखें या पकड़े
  • दायाँ हाथ से जीबहा करें।

Conclusion – निष्कर्ष

कुर्बानी के ताल्लुक से अल्लाह ने हमें कुरान में फ़रमाया हैँ, इसलिए यह बहुत सवाब का अमल हैँ, और Qurbani ki Dua और तारीका अल्लाह ने हमें हमारे प्यारे नबी ए करीम जनाब ए मुहम्मद सल्लाहु अलैहि वसल्लम के जरिये सीखाया हैँ, तो हमें यह दुआ जरुर याद करनी चाहिए हैँ और इस पर अमल भी करना चाहिए, बाकि हम इंसान हैँ और हमसे गलती होती हैँ, अगर मुझसे भी इस दुआ के ताल्लुक से कोई गलती हुई तो मुझे सही करना अल्लाह मुझे और आपको माफ करें आमीन!

उम्मीद करते हैं, आपको यह दुआ समझ आ गयी होंगी इसलिए इसे सभी तक पहुंचाए ताकि आप भी सवाब का जरिया बन सको क्योंकि जितने लोग इस दुआ को सीख कर उस पर अमल करेंगे तो उसका सवाब आपको भी मिलेगा इन शा अल्लाह

अस्सलामुअलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरहकातुहु

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाला सवाल

मुसलमान कुर्बानी क्यों दे रहे हैं?

मुसलमान कुर्बानी इसलिए दें रहें क्योंकि अल्लाह ने क़ुरान में फ़रमाया –
हर उम्मत के लिये हमने क़ुरबानी का एक क़ायदा तय कर दिया है; ताकि (उस उम्मत के) लोग उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उसने उनको बख़्शे हैं।(64) (इन अलग-अलग तरीक़ों के अन्दर मक़सद एक ही है) तो तुम्हारा ख़ुदा एक ही ख़ुदा है और उसी के तुम फ़रमाँबरदार बनो। और ऐ नबी, ख़ुशख़बरी दे दो आजिज़ाना रविश (विनम्र रवैया) अपनानेवालों को,
Surat No 22 : سورة الحج – Ayat No 34

कुर्बानी करते वक्त क्या पढ़ा जाता है?

कुर्बानी करते वक़्त की हमने आज 4 दुआ सीखी आप उनमें से कोई भी पढ़ सकते हो ( अल्लाह बेहतर जानता हैँ )

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