रोज़ा इफ्तार के वक़्त की दुआए : रोजा खोलने से पहले कौनसी दुआए मांगे ( Ramadan 2024 )

इफ्तार के वक्त की दुआएं: रमजान का मुबारक महीना मुसलमानों के लिए बहुत खास होता है। यह एक ऐसा वक्त है जब हर मुसलमान अपने आप को अल्लाह के और करीब महसूस करता है। इस महीने में रोजे, तरावीह की नमाज, कुरान की तिलावत और दुआएं पढ़ने का खास महत्व होता है। खासतौर पर इफ्तार के वक्त की दुआएं, जो रोजेदार के लिए अल्लाह की बारगाह में खास मकाम रखती हैं।

आज हम उन खास दुआओं को जानेंगे जिनको आप इफ्तार के वक़्त अल्लाह से मांग सकते हैँ, जरूरी नहीं कि आप इन दुआओं को ही मांगे इसके अलावा भी और बहुत सारी दुआएं हो सकती हैँ आप उनको भी मांग सकते हो।

Introduction

रमजान के पाक महीने में इफ्तार के वक्त की दुआएं एक खास अहमियत रखती हैं। यह वह वक्त होता है जब एक रोजेदार अपना दिन भर का रोजा खोलता है और अल्लाह से अपनी दुआओं की कबूलियत की उम्मीद करता है। इस ब्लॉग में हम आपको इफ्तार के वक्त पढ़ी जाने वाली कुछ खास दुआओं के बारे में बताएंगे जो आपके दिल को सुकून देंगी और आपको अल्लाह के और करीब लाएंगी।

इफ्तार के वक्त की दुआएं

  • दरूद शरीफ और सूरह फातिहा: इफ्तार की दुआ शुरू करने से पहले दरूद शरीफ और सूरह फातिहा का पढ़नी चाहिए।
  • कलमा ए तय्यब: “ऐ अल्लाह, हमारी जुबान पर कलमा तय्यब हमेशा जारी रख।”
  • ईमान की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें कामिल ईमान नसीब फरमा और पूरी हिदायत अता फरमा।”
  • रमजान की बरकतों की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें पूरे रमजान की नेमत, अनवर और बरकत से मालामाल फरमा।”
  • रहमत और रिज़्क की दुआ: “ऐ अल्लाह, हम पर अपनी रहमत नाजिल फरमा, करम की बारिश फरमा और रिज़्क-ए-हलाल अता फरमा।”
  • दीन पर अमल की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें दीन इस्लाम के अहकाम पर मुकम्मल तौर पर अमल करने वाला बना दे।”
  • लैलतुल कद्र की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें लैलतुल कद्र नसीब फरमा।”
  • बुराई से दूरी की दुआ: “ऐ अल्लाह, झूठ, गिबत, कीना, बुराई, झगड़ा, फसाद से दूर रख।”
  • सुकून और कर्ज़ से राहत की दुआ: “ऐ अल्लाह, हम से तंगदस्ती, खौफ, घबराहट, और कर्ज़ के बोझ से दूर फरमा।”
  • गुनाहों की माफी की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमारे छोटे बड़े (सगीरा वा कबीरा) तमाम गुनाह को माफ फरमा।”
  • शैतान और नफ्स के शर से महफूज़ रखने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें दज्जाल के फितने, शैतान और नफ्स के शर से महफूज़ रख।”
  • पर्दे की पाबंदी की दुआ: “ऐ अल्लाह, औरतों को पर्दे की पूरी पूरी पाबंदी करने की तौफीक अता फरमा।”
  • बीमारियों से महफूज़ रखने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हर छोटी बड़ी बीमारी से हमें और कुल मोमिनीन वा मोमिनात को महफूज़ रख।”
  • हुज़ूर अकदस के तरीके पर कायम रखने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें हुज़ूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्यारे तरीके पर कायम रख।”
  • सुन्नत पर चलने की तौफीक की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें हुज़ूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत पर चलने की तौफीक अता फरमा।”
  • जाम-ए-कौसर पीने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें हुज़ूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथों से जाम-ए-कौसर पीना नसीब फरमा।”
  • शफाअत नसीब फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें हुज़ूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शफाअत नसीब फरमा।”
  • अल्लाह और नबी की मोहब्बत दिल में डालने की दुआ: “ऐ अल्लाह, तू अपनी और हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत हमारे दिलों में डाल दे।”
  • मौत की सख्ती और कब्र के अज़ाब से बचाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें मौत की सख्ती और कब्र के अज़ाब से बचा।”
  • मुंकर नकीर के सवालात आसान फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें मुंकर नकीर के सवालात हम पर आसान फरमा।”
  • कयामत के दिन अल्लाह का दीदार नसीब फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें कयामत के दिन आपका दीदार नसीब फरमा।”
  • जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमा।”
  • कयामत की गर्मी और जहन्नम की आग से महफूज़ रखने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें कयामत के दिन कयामत की गर्मी और जहन्नम की आग से महफूज़ रख।”
  • हश्र की रुसवाइयों से बचाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें और तमाम मोमिनीन वा मोमिनात को हश्र की रुसवाइयों से बचा।”
  • नाम-ए-अमल दाहिने हाथ में नसीब फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें नाम-ए-अमल हमारे दाहिने हाथ में नसीब फरमा।”
  • अर्श के साये में जगह नसीब फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें अपने अर्श के साये में जगह नसीब फरमा।”
  • पुल सिरात पर बिजली की तरह गुजरने की तौफीक अता फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें पुल सिरात पर बिजली की तरह गुजरने की तौफीक अता फरमा।”
  • अचानक मौत से बचाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हम सबको अचानक मौत से बचा।”
  • कुरआन समझने और उस पर अमल करने वाला बनाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें कुरआन समझने और उस पर अमल करने वाला बना दे।”
  • बीमार और परेशान मुसलमानों की मदद करने की दुआ: “ऐ अल्लाह, जो मुसलमान बीमार और परेशान हैं या बेगुनाह कैद में हैं, उनकी गैब से मदद अता फरमा।”
  • सब्र करने वाला बनाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमें सब्र करने वाला बना दे।”
  • आज़माइश की मशक्कत से बचाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, आज़माइश की मशक्कत से, बुरी तकदीर से, नफ्स की तमाम बुराइयों से हमें महफूज़ रख।”
  • मुर्दों की बख्शिश और उन्हें कब्र के अज़ाब से बचाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमारे मुर्दों की बख्शिश कर, उन्हें कब्र के अज़ाब से बचा और जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम दे।”
  • टूटी-फूटी इबादतों को कबूल फरमाने की दुआ: “ऐ अल्लाह, हमारी टूटी-फूटी इबादतों को कबूल फरमा।”

निष्कर्ष

रमजान के पाक महीने में इफ्तार के वक्त की दुआएं हमें अल्लाह के और करीब लाती हैं और हमारे दिलों को सुकून देती हैं। यह दुआएं हमें याद दिलाती हैं कि अल्लाह हमेशा हमारे साथ है और हमें उसकी रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए। इस रमजान, आइए हम सभी इन दुआओं को पढ़ें और अल्लाह से अपने दिल की गहराइयों से दुआ करें।

अगर आपको यह दुआएं याद नहीं रहती हैं, तो आप रोज इफ्तार के वक़्त हमारी वेबसाइट को ओपन करें और इसे पढ़ कर दुआएं मांग सकते हो, इसके अलावा अगर आपको और भी दुआएं आती हो तो कमैंट्स करके जरूर बताए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल : FAQ

इफ्तार के वक्त की दुआ क्यों जरूरी है?

इफ्तार के वक्त की दुआ इसलिए जरूरी है क्योंकि यह वह समय होता है जब अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को खास तौर पर कबूल करता है। यह रोजेदार के लिए अपनी आत्मा को पवित्र करने और अल्लाह से नजदीकी बढ़ाने का एक मौका होता है।

इफ्तार की दुआ में क्या पढ़ा जाता है?

इफ्तार की दुआ में दरूद शरीफ, सूरह फातिहा, और खास दुआएं जैसे कि अल्लाह से माफी, रहमत, और बरकत की दुआएं पढ़ी जाती हैं। ये दुआएं खुद और सभी की भलाई के लिए होती हैं।

क्या इफ्तार की दुआ के लिए कोई खास तरीका है?

इफ्तार की दुआ के लिए कोई खास तरीका नहीं है, लेकिन यह सुन्नत है कि रोजेदार पहले अपने हाथ उठाकर अल्लाह का शुक्र अदा करे, फिर दरूद शरीफ और सूरह फातिहा पढ़े, और आखिर में अपनी दुआओं को पढ़े।

क्या इफ्तार की दुआ सिर्फ अरबी में ही पढ़ी जा सकती है?

नहीं, इफ्तार की दुआ को अरबी के साथ-साथ अपनी मातृभाषा में भी पढ़ा जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि दुआ दिल से की जाए और उसके मायने समझे जाएं।

इफ्तार की दुआ कितनी देर तक पढ़ी जा सकती है?

इफ्तार की दुआ को इफ्तार के समय से लेकर मगरिब की नमाज तक के बीच में पढ़ा जा सकता है। इस समय को दुआ के लिए बहुत ही मुकद्दस माना जाता है।

क्या इफ्तार की दुआ में किसी खास चीज की मांग की जा सकती है?

हां, इफ्तार की दुआ में आप अपनी खुद की जरूरतों, ख्वाहिशों और माफी के लिए अल्लाह से दुआ मांग सकते हैं। यह एक ऐसा समय होता है जब अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को खास तौर पर सुनता है।

अगर कोई इफ्तार की दुआ भूल जाए तो क्या करें?

अगर आप इफ्तार की दुआ भूल जाते हैं, तो आप अल्लाह से सामान्य दुआएं मांग सकते हैं और उसे अपने दिल की बात कह सकते हैं। अल्लाह के लिए आपकी नियत और भावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

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